Delhi Missing Person Crisis: दिल्ली से लड़कियों के लापता होने की क्या सच्चाई? जानिए | Delhi Police
सिस्टम की जानलेवा लापरवाही
पूरे इलाके में सर्चिंग क्यों नहीं की गई?
क्यों पुलिसवालों ने सिर्फ औपचारिकता निभाई?
सर्चिंग के नाम पर सिर्फ कागजी कार्रवाई क्यों?
अब हम जिस खबर का विश्लेषण करने वाले हैं उसमें आम आदमी की विवशता है. सिस्ट्म की संवेदनहीनता है. लापरवाही की पराकाष्ठा है...व्यवस्था की निर्मम लापरवाही में अपने प्रिय पुत्र को खो देनेवाले माता-पिता के बेबस आंसू हैं. आज आप बहुत गंभीरता से इस विश्लेषण को सुनिए और समझिए. क्योंकि इसमें आपकी-हमारी सबकी सामूहिक त्रासदी दर्ज है.. हमारा ये विश्लेषण आपको भावुक कर सकता है. आक्रोशित कर सकता है. आपको सोचने पर मजबूर कर सकता है कि क्या इस सिस्टम में एक आदमी की जिंदगी की कोई अहमियत नहीं है. हम आपसे आग्रह करेंगे की अपने जज्बात को, अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखिएगा. और बहुत गंभीर होकर देखिएगा और सुनिएगा जो हम आपको बताने जा रहे हैं..दिल्ली के जनकपुरी में 25 साल के कमल की एक हादसे में मौत हो गई है. सरकारी शब्दावली में 25 साल के नौजवान की मृत्यु एक दुर्घटना में हुई यही दर्ज है. लेकिन ये दुर्घटना में हुई मौत नहीं है. ये हत्या है. हम इसे हत्या क्यों कह रहे हैं आपको विस्तार से बताएंगे लेकिन पहले सुनिए की आखिर जनकपुरी में हुआ क्या था...
घटना अब से करीब 22 घंटे पहले की है. 25 साल का कमल रोहिणी में अपने ऑफिस से अपने घर कैलाशपुरी जाने के लिए निकला था. रात करीब 11 बजकर 30 मिनट के आसपास उसने घर पर फोन किया. कहा जनकपुरी डिस्ट्रिक सेंटर पर हूं. घर पहुंच रहा हूं. कमल ने जहां से घरवालों को फोन किया था वहां से उसके घर की दूरी महज 6 किलोमीटर है. घर पहुंचने में उसे बमुश्किल 15 मिनट का समय लगता है. घरवाले इंतजार करते रहे. 15 मिनट का समय गुजर गया. आधे घंटे का समय गुजर गया. एक घंटे का समय गुजर गया. रात 12 बजकर 30 मिनट तक कमल घर नहीं पहुंचे. घरवालों की चिंता बढ़ गई. परेशान माता-पिता विकासपुरी पुलिस स्टेशन पहुंच गए. यहां क्या हुआ हम विस्तार से बताएंगे. लेकिन पहले देखिए इसी बीच कमल के साथ क्या हुआ था...
सिस्टम के लिए कागज का टुकड़ा, अपनी ही बनाई हुई कागजी प्रक्रिया कैसे आम आदमी की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण है वो कमल ध्यानी की असमय मृत्यु ने फिर साबित हो गया. मित्रो कमल का परिवार रात के 12 बजकर 30 मिनट पर विकासपुरी थाने पहुंचा था. घरवाले चाहते थे गुमशुदगी की सूचना दर्ज हो और पुलिस जल्द से जल्द कमल को तलाशने का अभियान शुरू करे. लेकिन यहां फिर वही सिस्टम का नियम भारी पड़ गया. पुलिस ने कहा की गुमशुदगी की रिपोर्ट तो 24 घंटे बाद ही दर्ज होती है. घरवालों ने मोबाइल लोकेशन निकाल कर जानकारी जुटाने का आग्रह किया. पुलिस ने मोबाइल लोकेशन ट्रैक की और एक लोकेशन साझा भी की, लेकिन वह तुरंत डिलीट हो गई. जब दोबारा जानकारी मांगी गई, तो लोकेशन को गोपनीय बताते हुए देने से इनकार कर दिया गया. सिर्फ इतना बताया गया कि फोन लगभग 200 मीटर के दायरे में एक पार्क के आसपास है. दो पुलिसवाले मौके पर भेजे गए. उन्होंने पार्क की तलाशी की कागजी प्रक्रिया निपटाई और लौट गए... सवाल ये है कि जब लोकेशन का दायरा स्पष्ट था तो पूरे इलाके में सर्चिंग क्यों नहीं की गई.
क्यों पुलिसवालों ने सिर्फ औपचारिकता निभाई, कागजी कार्रवाई पूरी की और लौट गए..
#dnawithrahulsinha
#breakingnews #delhiwomenmissing #delhinews #delhipolice #delhimissingpersoncrisis
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सिस्टम की जानलेवा लापरवाही
पूरे इलाके में सर्चिंग क्यों नहीं की गई?
क्यों पुलिसवालों ने सिर्फ औपचारिकता निभाई?
सर्चिंग के नाम पर सिर्फ कागजी कार्रवाई क्यों?
अब हम जिस खबर का विश्लेषण करने वाले हैं उसमें आम आदमी की विवशता है. सिस्ट्म की संवेदनहीनता है. लापरवाही की पराकाष्ठा है...व्यवस्था की निर्मम लापरवाही में अपने प्रिय पुत्र को खो देनेवाले माता-पिता के बेबस आंसू हैं. आज आप बहुत गंभीरता से इस विश्लेषण को सुनिए और समझिए. क्योंकि इसमें आपकी-हमारी सबकी सामूहिक त्रासदी दर्ज है.. हमारा ये विश्लेषण आपको भावुक कर सकता है. आक्रोशित कर सकता है. आपको सोचने पर मजबूर कर सकता है कि क्या इस सिस्टम में एक आदमी की जिंदगी की कोई अहमियत नहीं है. हम आपसे आग्रह करेंगे की अपने जज्बात को, अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखिएगा. और बहुत गंभीर होकर देखिएगा और सुनिएगा जो हम आपको बताने जा रहे हैं..दिल्ली के जनकपुरी में 25 साल के कमल की एक हादसे में मौत हो गई है. सरकारी शब्दावली में 25 साल के नौजवान की मृत्यु एक दुर्घटना में हुई यही दर्ज है. लेकिन ये दुर्घटना में हुई मौत नहीं है. ये हत्या है. हम इसे हत्या क्यों कह रहे हैं आपको विस्तार से बताएंगे लेकिन पहले सुनिए की आखिर जनकपुरी में हुआ क्या था...
घटना अब से करीब 22 घंटे पहले की है. 25 साल का कमल रोहिणी में अपने ऑफिस से अपने घर कैलाशपुरी जाने के लिए निकला था. रात करीब 11 बजकर 30 मिनट के आसपास उसने घर पर फोन किया. कहा जनकपुरी डिस्ट्रिक सेंटर पर हूं. घर पहुंच रहा हूं. कमल ने जहां से घरवालों को फोन किया था वहां से उसके घर की दूरी महज 6 किलोमीटर है. घर पहुंचने में उसे बमुश्किल 15 मिनट का समय लगता है. घरवाले इंतजार करते रहे. 15 मिनट का समय गुजर गया. आधे घंटे का समय गुजर गया. एक घंटे का समय गुजर गया. रात 12 बजकर 30 मिनट तक कमल घर नहीं पहुंचे. घरवालों की चिंता बढ़ गई. परेशान माता-पिता विकासपुरी पुलिस स्टेशन पहुंच गए. यहां क्या हुआ हम विस्तार से बताएंगे. लेकिन पहले देखिए इसी बीच कमल के साथ क्या हुआ था...
सिस्टम के लिए कागज का टुकड़ा, अपनी ही बनाई हुई कागजी प्रक्रिया कैसे आम आदमी की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण है वो कमल ध्यानी की असमय मृत्यु ने फिर साबित हो गया. मित्रो कमल का परिवार रात के 12 बजकर 30 मिनट पर विकासपुरी थाने पहुंचा था. घरवाले चाहते थे गुमशुदगी की सूचना दर्ज हो और पुलिस जल्द से जल्द कमल को तलाशने का अभियान शुरू करे. लेकिन यहां फिर वही सिस्टम का नियम भारी पड़ गया. पुलिस ने कहा की गुमशुदगी की रिपोर्ट तो 24 घंटे बाद ही दर्ज होती है. घरवालों ने मोबाइल लोकेशन निकाल कर जानकारी जुटाने का आग्रह किया. पुलिस ने मोबाइल लोकेशन ट्रैक की और एक लोकेशन साझा भी की, लेकिन वह तुरंत डिलीट हो गई. जब दोबारा जानकारी मांगी गई, तो लोकेशन को गोपनीय बताते हुए देने से इनकार कर दिया गया. सिर्फ इतना बताया गया कि फोन लगभग 200 मीटर के दायरे में एक पार्क के आसपास है. दो पुलिसवाले मौके पर भेजे गए. उन्होंने पार्क की तलाशी की कागजी प्रक्रिया निपटाई और लौट गए... सवाल ये है कि जब लोकेशन का दायरा स्पष्ट था तो पूरे इलाके में सर्चिंग क्यों नहीं की गई.
क्यों पुलिसवालों ने सिर्फ औपचारिकता निभाई, कागजी कार्रवाई पूरी की और लौट गए..
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